कार्रवाई : मोहाना और बीरा रेत खदान की ईटीपी बंद, पंचायत की आड़ में दोनों खदानों को चला रहे थे रेत माफिया

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सांकेतिक तस्वीर।

* खनिज उत्खनन में नियमों का पालन न करने पर कलेक्टर ने लगाई रोक

* प्रतिबंधित मशीनों के जरिए नदी में पानी के अंदर से निकाली जा रही थी रेत

* पन्ना में मची रेत की लूट में प्रशासन की संलिप्तता पर सवाल उठते ही शुरू हुई कार्रवाई

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में मानसून सीजन की समाप्ति के बाद नए सिरे से मची रेत की जबरदस्त लूट की घोर अनदेखी को लेकर जिला प्रशासन एवं पुलिस की भूमिका पर चौतरफा सवाल उठने से बने नैतिक दबाब के चलते आखिरकार कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो गया है। रेत माफिया को खुला संरक्षण देने के प्रशासन पर लगे आरोपों के बीच पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने रेत के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। दो दिन पूर्व कलेक्टर ने स्वयं अजयगढ़ क्षेत्र की रेत खदानों में दबिश देकर 3 एलएनटी मशीनों और 15 डम्फरों को पकड़ने के बाद आज मोहाना तथा बीरा पंचायत की रेत खदानों की ईटीपी को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। खनिज उत्खनन में नियमों का पालन न करने पर यह कार्रवाई की गई है।
कर्मवीर शर्मा, कलेक्टर पन्ना।
उल्लेखनीय है कि 22 जनवरी को पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने मोहन रेत खदान में दबिश देकर वहाँ से एक एलएनटी मशीन पकड़ी थी। इस दैत्याकार मशीन के जरिये नदी का सीना और कोख छलनी कर पानी के अंदर से रेत निकाली जा रही थी। प्रतिबंधित मशीन से रेत खनन करने एवं अन्य नियम-शर्तों का उल्लंघन करने कारण मोहाना पंचायत की खदान की ईटीपी बंद की गई है। जनपद पंचायत अजयगढ की ग्राम पंचायत मोहाना की खदान पर दूसरी बार रोक लगी है। इसके पूर्व कलेक्टर मनोज खत्री ने भी मोहाना खदान की ईटीपी बंद की थी। मोहाना नंबर- 1 के नाम से खसरा नम्बर 1463 रकवा 6.74 हेक्टेयर में संचालित इस खदान को अघोषित तौर पर रेत माफियाओं का संगठित गिरोह लम्बे समय से चला रहा था।
इसी प्रकार जनपद पंचायत अजयगढ़ के ग्राम बीरा में पंचायत को आवंटित खदान का संचालन भी रेत माफिया अब तक धड़ल्ले से करते रहे हैं। इसके एवज में माफियाओं से जिले के प्रशासनिक अधिकारियों को कथित तौर पर लाखों रुपए एडवांस बतौर कमीशन देने होते हैं। एक वायरल वीडियो से बात का खुलासा हुआ है। वीडियो में कांग्रेस नेता एवं अजयगढ़ के जनपद अध्यक्ष भरत मिलन पाण्डेय, पन्ना विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी रहे दशरथ पहलवान, बीरा सरपंच जुगराज सिंह एवं रेत माफियाओं के बीच प्रशासनिक मैनेजमेंट की चर्चा हो रही है। इस वीडियो के सोशल मीडिया में वायरल होने से प्रदेश की कमलनाथ सरकार की अच्छी-खासी बदनामी हो रही है। वीडियो के माध्यम से पन्ना जिले के शीर्ष अधिकारियों के कथित संरक्षण में चल रही रेत की लूट का पर्दाफश होने के साथ अधिकारियों का रेट कार्ड भी मीडिया की सुर्ख़ियों में बना है। माना जा रहा है कि, रेत माफियाओं की बातचीत का वीडियो के वायरल होने से हो रही फजीहत के चलते ही बीरा खदान की ईटीपी तत्काल प्रभाव से बंद की गई है।
ग्राम बीरा नम्बर-3 खसरा नम्बर-1 रकवा 6.00 हेक्टेयर में संचालित पंचायत की रेत खदान के साथ-साथ वहाँ केन नदी में अन्य स्थानों से माफिया खुलेआम मशीनों से बड़े पैमाने पर रेत खनन कर रहे थे। बीरा से निकलने वाली अवैध रेत का परिवहन पंचायत की ईटीपी पर होता था। हालांकि शुक्रवार 24 जनवरी को पन्ना कलेक्टर के हस्ताक्षर से जारी ईटीपी बंद करने के आदेश में जिला प्रशासन द्वारा सरपंच ग्राम पंचायत बीरा एवं मोहाना के द्वारा रेत का गौण खनिज नियमों के तहत उत्खनन न करना, प्लान, सिया/डिया पर्यावणीय अनुमति के तहत एवं स्वीकृत आदेश/अनुबंध पत्र की निहित शर्तों का पालन न किए जाने पर तत्काल प्रभाव से स्वीकृत क्षेत्र खदान की ईटीपी बंद करने का उल्लेख किया गया है।
रेत से लोड वाहनों की धरपकड़ की कार्रवाई को अंजाम देते हुए पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा का फाइल फोटो।
रुपए लेकर रेत माफियाओं को पालने के कथित खुलासे से जिले के कतिपय अधिकारियों की भूमिका पर लोगों को अफ़सोस तो जरूर हुआ लेकिन हैरानी बिल्कुल भी नहीं हुई। क्योंकि, इस सच्चाई को पन्ना के लोग पिछले 6 साल से भलीभांति जान रहे हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिले के मौजूदा अधिकारी अपनी साख और कुर्सी बचाने के लिए फिलहाल रेत माफिया के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दिखना चाह रहे हैं या फिर यह वे इस मुहिम को ईमानदारी के साथ आगे भी जारी रखते हैं। पंचायतों की रेत खदानों में नियम-शर्तों का पालन न होने का मामला सिर्फ कुछ समय के लिए ईटीपी बंद करने की फौरी कार्रवाई तक ही सिमटकर रह जायेगा या फिर संबंधितों की जबाबदेही तय कर उनके विरुद्ध कोई एक्शन भी लिया जाएगा। आने वाले दिनों में इस पर लोगों की नजर रहेगी।