भाजयुमो नेता सुसाइड केस : प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अब अजयगढ़ थाना में भी FIR दर्ज

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फाइल फोटो।

*   अजयगढ़ के माधौगंज तिराहा पर वाहन में शव रखकर किया था चक्काजाम

*   टीआई अजयगढ़ का दावा, पुलिस की रिपोर्ट पर 20-25 अज्ञात लोगों को बनाया आरोपी

*   नरदहा में चक्का जाम करने के मामले में धरमपुर थाना में भी दर्ज है प्रकरण

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में भारतीय जनता युवा मोर्चा मंडल धरमपुर के मंत्री दुर्गेश सोनकर की आत्महत्या को लेकर कथित तौर पर पुलिस को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। दुर्गेश की भाभी के साथ दबंगों के द्वारा बदसलूकी करने जैसे गंभीर मामले में पुलिस के द्वारा रिपोर्ट दर्ज न करने के कारण दुखी और परेशान होकर उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में आरोपियों को बचाने के मकसद से जानबूझकर उदासीनता बरतने के आरोपों से घिरी पन्ना जिले की पुलिस अब दुर्गेश को न्याय दिलाने के लिए चक्का जाम कर प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ तत्परता से सख्त कार्रवाई करने को लेकर चर्चा में आ गई है।
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जिले के धरमपुर थाना के बाद अजयगढ़ थाना में भी चक्का जाम कर आम रास्ता अवरुद्ध करने का मामला पंजीबद्ध हुआ है। अजयगढ़ थाना के प्रभारी निरीक्षक अरविंद कुजूर ने रडार न्यूज़ को मोबाइल पर जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस की रिपोर्ट पर धारा 147, 341,149 ताहि. के तहत दर्ज प्रकरण में 20-25 अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। इसके पूर्व नरदहा चौकी प्रभारी मिट्ठूलाल कोल की रिपोर्ट पर धरमपुर थाना में भी इन्हीं धाराओं के तहत 40-50 अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध नरदहा में कालिंजर-चित्रकूट (बघेलाबारी) मार्ग पर चक्का जाम करने का मामला दर्ज हुआ था।
पन्ना जिले के नरदहा ग्राम में भाजयुमो नेता के आत्महत्या करने से आक्रोशित ग्रामीणों ने कालिंजर-चित्रकूट मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। (फ़ाइल फोटो)
उल्लेखनीय है कि, बुधवार 20 अक्टूबर की अल सुबह भारतीय जनता युवा मोर्चा मंडल धरमपुर के मंत्री दुर्गेश सोनकर का शव उनके अपने घर में फांसी के फंदे पर लटका हुआ मिला था। युवा दलित नेता के आत्मघाती कदम उठाने को लेकर मृतक के भाई दिनेश सोनकर एवं युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष शिवकांत विश्वकर्मा ने पत्रकारों से चर्चा में दुर्गेश की मौत के लिए पुलिस को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया था। इस घटना को लेकर पुलिस के खिलाफ व्यापक जनाक्रोश के चलते नरदहा में ग्रामीणों ने पुलिस चौकी में हंगामा करने के बाद कालिंजर-चित्रकूट (बघेलाबारी) मार्ग पर चक्का जाम कर वाहनों का आवागमन पूर्णतः अवरुद्ध कर दिया था।
नरदहा में सुबह करीब 8 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक चले लंबे चक्का जाम को खुलवाने के लिए मौके पर मौजूद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों की दोनों मांगों, दबंगों के खिलाफ बदसलूकी का प्रकरण दर्ज करने एवं जानबूझकर रिपोर्ट न लिखने वाले नरदहा व धरमपुर थाना प्रभारी को हटाने की कार्यवाही का आश्वासन दिया था। लेकिन दोनों ही मांगों के संबंध में अब तक क्या कार्यवाही की गई है, पुलिस के अधिकारी इस सबंध में कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। जिससे दिए गए आश्वासन पर पुलिस के अधिकारियों की कथनी और करनी को लेकर संशय पैदा होने के साथ उनकी मंशा पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

न्याय के लिए शव को पन्ना लाने की थी तैयारी

पुलिस चौकी नरदहा का घेराव कर हंगामा करते हुए ग्रामीणजन। (फ़ाइल फोटो)
भाजयुमो नेता दुर्गेश की मौत को लेकर पुलिस के रवैये से नाराज लोगों ने अजयगढ़ में शव के पोस्टमार्टम के बाद गुरुवार 21 अक्टूबर की सुबह स्थानीय माधौगंज तिराहा पर वाहन में शव रखकर पुनः चक्का जाम किया था। अजयगढ़ थाना में प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध दर्ज प्रकरण जिसकी रिपोर्ट कथित तौर पर पुलिस के द्वारा लिखवाना बताया गया, जिसमें उल्लेख है कि सुबह 9:50 बजे एक वाहन में शव रखकर माधौगंज तिराहा पर आम रोड पर 20-25 लोगों ने चक्का जाम कर आवागमन अवरुद्ध कर दिया था। बीच सड़क पर मृतक के शव को रखकर प्रदर्शनकारी कह रहे थे कि, शव लेकर पन्ना कलेक्टर के पास जाएंगे, हमें न्याय नहीं मिला। चक्का जाम के दौरान उक्त लोग पुलिस के खिलाफ उग्र नारेबाजी भी कर रहे थे।
(फाइल फोटो)
प्रशासनिक अधिकारियों के समझाइश देने के काफी समय बाद सुबह करीब 10:30 प्रदर्शनकारियों के द्वारा चक्का जाम समाप्त किया गया। इस मामले में प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध दर्ज रिपोर्ट में फरियादी पुलिस/मध्य प्रदेश शासन या फिर अन्य कोई व्यक्ति है इसे लेकर कई तरह की चर्चायें हैं। हालांकि अजयगढ़ थाना प्रभारी अरविंद कुजूर की मानें तो रिपोर्ट पुलिस ने दर्ज कराई है। बहरहाल दुर्गेश के सुसाइड केस में शुरू से आमजन की आलोचना, आक्रोश और असंतोष का सामना कर रही पन्ना पुलिस के द्वार प्रदर्शनकारियों की मांगों को लेकर आश्वासन के बाद भी कार्यवाही न करने से लोग खासे हैरान हैं। चिंताजनक बात यह है कि, आमजन में पुलिस के प्रति भरोसे का आभाव पहले से ही है, ऐसे में अगर आश्वासन देने के बाद भी कार्यवाही नहीं होगी तो इसका विपरीत असर पुलिस की साख पर पड़ना तय माना जा रहा है।