शिकार के लिए लगाए गए फंदे में फंसा तेंदुआ, रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बचाई जान

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तेंदुए को रेस्क्यू वाहन के पिंजड़े में कैद कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ने के लिए रवाना करातीं हुई दक्षिण वन मंडल पन्ना की डीएफओ मीना कुमारी मिश्रा।

पन्ना जिले के दक्षिण वन मण्डल अंतर्गत शाहनगर रेन्ज की घटना

शिकारियों-तस्करों की सक्रियता के चलते खतरे में बेजुबान वन्यजीव

पिछले 3 साल में करीब दर्जन भर तेंदुए हो चुके है असमय काल-कवलित

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश का पन्ना जिला बाघों-तेंदुओं के शिकार की चिंताजनक घटनाओं, उनके अंगों की तस्करी एवं अन्य गंभीर प्रकृति के वन अपराधों को लेकर लंबे समय से सुर्ख़ियों में बना है। जिले में शिकारियों की बढ़ती सक्रियता यहां के जंगलों में विचरण करने वाले वन्य जीवों के लिए बेहद गंभीर खतरा बन चुकी है। शिकार की घटनाओं की रोकथाम को लेकर जंगल से सटे खेतों की बारी-बागड़ की सघन जांच कराने, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर विशेष सतर्कता बरतने संबंधी वन विभाग के अफसरों के दावों के बीच मंगलवार 23 मार्च की सुबह एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है।
पन्ना जिले ग्राम चौपरा में एक खेत की बारी में लगाए गए फंदे में फंसने के कारण बेवश और लाचार सा पड़ा नर तेंदुआ।
पन्ना के दक्षिण वन मण्डल की दूरस्थ रेन्ज शाहनगर के ग्राम चौपरा में एक व्यस्क नर तेंदुआ क्लिच वायर के फंदे में फंसा मिला। वन्य जीव का शिकार करने के इरादे से खेत की बारी में लगाए गए फंदे में तेंदुए के फंसने की खबर आते ही सुबह-सुबह हड़कंप मच गया। शाहनगर के वन अमले की तत्परता एवं पन्ना टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम ने करीब 3 घण्टे की कड़ी मशक्कत कर संकटग्रस्त तेंदुए को सफलतापूर्वक रेस्क्यू करके आखिरकार उसकी जान बचा ली। तेंदुए को फंदे से आजाद कर प्राथमिक उपचार के बाद देर शाम समीपी जंगल में स्वछंद विचरण करने छोड़ दिया गया। इस मामले में खेत मालिक अशोक राठौर निवासी ग्राम चौपरा के खिलाफ वन अपराध पंजीबद्ध किया गया है। अशोक पर शिकार करने की नियत से अपने खेत की बारी में फंदा लगाने का आरोप है।
पन्ना जिले के दक्षिण वन मंडल अंतर्गत शाहनगर वन परिक्षेत्र के ग्राम चौपरा में तेंदुए के रेस्क्यू ऑपरेशन को देखते हुए स्थानीय लोग।
चौपरा ग्राम के कुछ लोगों ने सुबह-सुबह फंदे में फंसे एक तेंदुए को छटपटाते और चींखते-चिल्लाते हुए देखा तो तुरंत इसकी सूचना आनन-फानन में परिक्षेत्र अधिकारी शाहनगर आनंद शिवहरे को दी। मामले की गंभीरता को देखते रेंजर श्री शिवहरे दल-बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंच गए। उनके द्वारा पन्ना में बैठे वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों को घटना की जानकारी दी गई और रेस्क्यू ऑपरेशन की आवश्यकता के मद्देनजर पन्ना टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम को मौके पर बुलाया गया।
दोपहर करीब 11 चौपरा पहुंची रेस्क्यू टीम के प्रमुख वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता के द्वारा अत्यंत ही सावधानी पूर्वक व्यस्क नर तेंदुए को ट्रैंकुलाइज किया गया। तेंदुए के बेहोश होने पर बड़ी ही सतर्कता के साथ उसके शरीर के पिछले हिस्से में कसे फंदे को काटकर उसका प्राथमिक उपचार किया। तत्पश्चात दक्षिण वन की डीएफओ मीना कुमारी मिश्रा के निर्देश पर तेंदुए को रेस्क्यू वाहन के पिंजरे में कैद कर उसे नजदीकी मरहा के जंगल स्वछंद विचरण हेतु छोड़ा गया। तब कहीं जाकर दक्षिण वन मंडल के अधिकारियों एवं मैदानी अमले ने राहत की सांस ली।

पांच घण्टे बाद पिंजड़े से बाहर निकला तेंदुआ

पन्ना टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम के द्वारा ट्रैंकुलाइज किए जाने के बाद अचेत अवस्था में पड़ा नर तेंदुआ।
खेत की बारी में शिकार की मंशा से लगाए गए फंदे में दरम्यानी रात से फंसा तेंदुआ खुद से आजाद होने की छटपटाहट में थक-हार कर वहीं पड़ा था। इस जद्दोजहद में उसके शरीर के पिछले हिस्से में क्लिच वायर का फंदा अत्याधिक तेजी से कसने के कारण उसका हिलना-डुलना मुशिकल हो गया। दोपहर में करीब 2 बजे उसे सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर जब मरहा के जंगल में छोड़ने के लिए ले जाया गया तो वह पिंजड़े से 5 घण्टे तक बाहर ही नहीं निकला। जिससे मौके पर मौजूद रेस्क्यू टीम के सदस्य एवं दक्षिण वन मंडल पन्ना के अधिकारी-कर्मचारी चिंतित और परेशान नजर आए। तेंदुए को बाहर निकालने के लिए वाहनों के हार्न बजाए गए एवं अन्य दूसरे तरीके से थोड़ा शोर मचाया गया। फलस्वरूप तेंदुआ दो बार पिंजड़े से बाहर तो निकला लेकिन वापिस फिर से पिंजड़े में ही चला गया। शाम करीब 7 बजे थोड़ा अँधेरा होने के बाद तेंदुआ को जब माहौल सुरक्षित और अनुकूल लगा तब वह पिंजड़े से बाहर आया और फिर जंगल की तरफ चला गया। इस तरह तेंदुए ने पिंजड़े से बाहर निकलने के लिए लगभग 5 घण्टे तक इंतजार कराया।

फिर सामने आया गैर जिम्मेदाराना रवैया

मंगलवार 23 मार्च की सुबह शाहनगर बीट अंतर्गत ग्राम चौपरा के वन कक्ष क्रमांक पी-988 में एक तेंदुए के फंदे में फंसे होने की खबर फैलते ही दक्षिण वन मण्डल के अधिकारियों के द्वारा अपनी फितरत के अनुसार घटना की वास्तविकता को छिपाते हुए गांव (आबादी क्षेत्र) में तेंदुआ के घुसने की बात कही जाती रही। लेकिन स्थानीय लोग फंदे में फंसे तेंदुए का फोटो और वीडियो बनाकर पहले ही वायरल कर चुके थे,जिससे क्षेत्र में शिकारियों की सक्रियता छिपाने का कथित प्रयास विफल हो गया। मालूम हो कि, दक्षिण वन मंडल अंतर्गत पिछले तीन साल में करीब एक दर्जन तेंदुओं का शिकार अथवा संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत होने के मामले सामने आए हैं।
वन मण्डलाधिकारी दक्षिण वन मण्डल पन्ना का कार्यालय। (फोटो)
शिकार की बढ़ती घटनाओं की रोकथाम में असफल रहने एवं अपनी अक्षम्य लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए जिम्मेदारों के द्वारा पूर्व में भी शिकार की घटनाओं को छिपाने के लिए तमाम कोशिशें की जाती रहीं हैं। किसी मामले के सामने आने के बाद मीडिया कर्मियों के फोन रिसीव न करना अथवा वन मण्डल के अधिकारियों के मोबाइल फोन बंद हो जाना अब आम बात हो चुकी है। दक्षिण वन मण्डल पन्ना के अफसरों का यह रवैया मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के “कथित सुशासन के ढोल की पोल” खोलने वाला है। दरअसल दर्जन भर तेंदुओं की मौत के बाद भी सरकार में बैठे लोगों एवं वन मुख्यालय भोपाल के अफसरों की उदासीनता के चलते पन्ना में उनके मातहत जबावदेही के आभाव में पूरी तरह गैर जिम्मेदाराना तरीके से बर्ताव कर रहे हैं। चौपरा की घटना में एक बार फिर इनका यही रवैया सामने आया है।