एमपी के पन्ना जिले में अनिश्चितकालीन लॉकडाउन के आदेश जारी ! कलेक्टर के नए आदेश को लेकर असमंजस में लोग

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नवीन संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन पन्ना का फाइल फोटो।

* लॉकडाउन का दूसरा चरण 16 अप्रैल से शुरू होकर आगामी आदेश तक चलेगा ?

* पूर्व में 28 मार्च से 16 अप्रैल तक के लिए घोषित किया था लॉकडाउन

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) कोरोना वायरस संक्रमण (कोविड-19) की प्रभावी रोकथाम को लेकर मंगलवार 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में जनहित में लॉकडाउन को 3 मई तक के लिए बढ़ाने का ऐलान किया है। पिछले माह 25 मार्च से शुरू हुआ 21 दिनों का पहला देशव्यापी लॉकडाउन 14 अप्रैल को समाप्त हो चुका है। अब 19 दिन इसे और बढ़ाने के साथ ही लॉकडाउन की कुल अवधि 40 दिन हो गई है। लेकिन मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में लॉकडाउन की समयावधि का हिसाब-किताब शुरू से ही बाकी देश से अलग चल रहा है। जिले में लॉकडाउन का पहला चरण 28 मार्च से 16 अप्रैल तक घोषित किया गया था। अब दूसरे चरण में 16 अप्रैल से अनिश्चितकालीन लॉकडाउन का आदेश जारी किया गया है। पन्ना कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट कर्मवीर शर्मा ने लॉकडाउन 2.0 को लेकर बुधवार 15 अप्रैल को आदेश जारी किया है। जिसमें यह कहा गया है कि पूर्व में जारी लॉकडाउन के आदेश की अवधि 16 अप्रैल से आगामी आदेश तक के लिए बढ़ाई जाती है। यह आदेश 15 अप्रैल से ही आगामी आदेश तक प्रभावशील हो चुका है।
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में आवश्यकतानुसार उक्त अवधि में संशोधन करने की बात कही है। मगर यह साफ़ नहीं किया गया कि दूसरे चरण का लॉकडाउन 16 अप्रैल से शुरू होकर आखिर कब तक चलेगा ? लॉकडाउन 2.0 को लेकर पहले से चिंतित और परेशान जिले के गरीब और कमजोर तबकों के लोगों की मुश्किलें और बेचैनी इस बेमयांदी आदेश ने बढ़ा दी है। अनिश्चितता की यह स्थिति तब है जबकि पन्ना जिला अभी तक कोरोना के ग्रीन जोन वाले इलाकों में शामिल है। अर्थात अभी तक पन्ना जिले में कोरोना वायरस संक्रमण का एक भी मामला प्रकाश में नहीं आया है।
पन्ना कलेक्टर एवं जिलादण्डाधिकारी के द्वारा जारी लॉकडाउन में वृद्धि सम्बंधी आदेश।
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने सम्बोधन में कहा था कि 20 अप्रैल तक अग्नि परीक्षा है, इस दौरान हर कस्बे, थाना, जिले और राज्य को परखा जाएगा कि लॉकडाउन का कितना पालन हुआ और इलाका संक्रमण से कितना बचा हुआ है। उन्होंने कहा था कि इसी आधार पर 20 अप्रैल के बाद कुछ गतिविधियों की सशर्त छूट दी जाएगी। साथ ही उन्होंने यह चेतावनी भी दी थी कि अगर नियम टूटे और इलाके में संक्रमण फैला तो सारी छूट तुरंत वापस ले ली जायेगी। वर्तमान में ग्रीन जोन में चल रहे पन्ना जिले में आवश्यक गतिविधियों में छूट मिलेगी या नहीं इसका फैसला तो 20 अप्रैल तक बनने वाली स्थितियों के आंकलन पर निर्भर करेगा। ग्रीन जोन वाले इलाकों में आवश्यक गतिविधियों के लिए लॉकडाउन में सशर्त और सीमित छूट को लेकर प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद गृह मंत्रालय ने एक विस्तृत गाइडलाईन जारी की है। जिसमें यह स्पष्ट किया गया है, किन गतिविधियों में छूट दी जाएगी।
बहरहाल ग्रीन जोन वाले अति पिछड़े एवं उद्योग विहीन पन्ना जिले के लोग लॉकडाउन की सशर्त छूट को लेकर जितने उत्सुक नहीं उससे कहीं अधिक दूसरे चरण के लॉकडाउन की अनिश्चित अवधि को लेकर असमंजस में हैं। जिले की बहुसंख्यक आबादी जीविकोपार्जन के लिए दिहाड़ी मजदूरी और कृषि पर निर्भर है। कोरोना संकट व लॉकडाउन के चलते जिले के रोज खाने-कमाने वाले परिवार अपने जीवन के सबसे मुश्किल दौर से गुजर हैं। कई तरह के आभाव के बीच किसी तरह पहले चरण का लॉकडाउन पूरा कर चुके गरीब-मजदूर परिवारों को मौजूदा हालात में कोरोना संक्रमण कहीं ज्यादा भूख से मौत का डर सता रहा है। खाद्यान्न एवं किराना सामग्री को मोहताज परिवार हर क्षण कोरोना महामारी के साथ-साथ भूख से भी जंग लड़ रहें है। जिंदगी के जल्द से जल्द दोबारा पटरी पर लौटने की उम्मीद में बैचेन कतार के आख़िरी खड़े पन्ना जिले के लोगों को लॉकडाउन वृद्धि के आदेश में किसी निश्चित समयावधि का उल्लेख न होने से तगड़ा झटका लगा है।
कर्मवीर शर्मा, कलेक्टर पन्ना।
पन्ना कलेक्टर एवं जिलादण्डाधिकारी ने दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 में निहित शक्तियों का उपयोग करते हुए जिले में पहले से जारी लॉकडाउन की अवधि को आगामी आदेश तक बढाने सम्बंधी अनिश्चित समयावधि वाला आदेश जारी करके जाने-अनजाने आम लोगों की परेशानी और तनाव को प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से बढ़ाने का काम किया है। इस आदेश में कहा गया है कि, उक्त प्रभावशील अवधि में इस आदेश का उल्लंघन धारा 188 भारतीय दण्ड विधान अंतर्गत अपराध की श्रेणी में आएगा। इस आदेश के आने बाद लोग यह सवाल पूँछ रहे हैं कि उन्हें अपने घरों में कब तक कैद रहना पड़ेगा। इसे विडम्बना ही कहा जाएगा कि इस कठिन और चुनौतीपूर्ण समय आगे आकर वस्तुस्थिति स्पष्ट करना जिनकी जिम्मेदारी है वे महत्वपूर्ण सवालों पर मौन साधे हुए हैं या फिर उन्हें जानबूझकर नजरअंदाज कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पन्ना कलेक्टर से जब उनके आदेश के सम्बंध में बात करने के लिए प्रयास किया गया तो उनके सरकारी मोबाइल नम्बर पर कई बार रिंग जाने के बाद भी मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ।

इनका कहना है –

“आपदा के समय प्रशासन को इस तरह के तकनीकी रूप से अस्पष्ट आदेश जारी करने से बचना चाहिए है। आदेश में लॉकडाउन वृद्धि की निश्चित अवधि (तिथि) का खुलासा न होने से अनिश्चितता के चलते लोगों में भ्रम की स्थिति निर्मित हो सकती है साथ ही इससे लोगों की तकलीफ और तनाव बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसा इसलिए है क्योंकि गरीब और कमजोर तबके के लोग पहले से ही काफी परेशान हैं। प्रधानमंत्री जी ने जब दूसरे चरण का देशव्यापी लॉकडाउन 3 मई तक घोषित किया है तो जिला स्तर पर जारी लॉकडाउन वृद्धि के आदेश में 3 मई या अन्य कोई अवधि (तिथि) घोषित करना उचित होता। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी को दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 में निहित शक्तियों का उपयोग करते लॉकडाउन की अवधि को आवश्यकतानुसार घटाने और बढ़ाने का अधिकार।”

– शैलेष विश्वकर्मा, एडवोकेट पन्ना।

“कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए लॉकडाउन जरूरी है इसलिए हमारी कौंग्रेस पार्टी ने भी राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दूसरे चरण का समर्थन किया है। लेकिन पन्ना जिले में लॉकडाउन वृद्धि को लेकर जिस तरह का आदेश जारी किया गया है वह समझ से परे है। हम किसी को क्या बताएंगे कि, हमारे जिले में लॉकडाउन की अवधि आगामी आदेश तक के लिए बढ़ाई गई है, इसका क्या मतलब है ? जिला प्रशासन को चाहिए कि संकट की घड़ी में वह या तो देशव्यापी लॉकडाउन के साथ चले अगर इससे अलग कोई स्टैंड है तो उसमें स्पष्टता आवश्यक है। पन्ना जिला अभी तक कोरोना से पूर्णतः सुरक्षित है इसलिए लॉकडाउन वृद्धि को लेकर यहाँ इस तरह की अस्पष्टता/अनिश्चितता वाले आदेश का क्या औचित्य है। लोग कोरोना संक्रमण के खतरे और लॉकडाउन को लेकर पहले से ही कई समस्याओं से जूझ रहे हैं, ऐसे में लॉकडाउन वृद्धि के आदेश में किसी निश्चित अवधि का खुलासा न करना प्रशासनिक असंवेदनशीलता को परिलक्षित करता है।”

– डी. के. दुबे वरिष्ठ कौंग्रेस नेता पन्ना।